यूँ तो कितने करीब हम और तुम है अभी
जाने क्यूँ यूँ लगे न मिले हो कभी
बे निशाँ हो गई है धुएँ की तरह
दिल के मेले में मेरी ये कोशिश सभी
कुछ है तेरा कसूर कुछ है मेरी कमी
मुझको जीने न दे आँखों की ये नमी
कैसे में आगे बढ़के तुझे जान लूँ
आंधिया मेरे दिल पे एक पल ना थमी
सोमवार, 30 मार्च 2009
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