अपने हज़ार अश्को की दुआ करूँ
जो भटक के डर बदर अगर
मेरे अश्क सूखे तो मैं क्या करूँ
तेरी राह में तेरा साथ दूँ
ये वादा है इरादा है
मेरे नाकाम सफर से थक अगर
मेरे पग रुके तो मैं क्या करूँ
मैंने तो छोडा ये जहाँ
मेरी जमीं तू आसमां
दुनिया से डर तू ही अगर
पीछे हटे तो मैं क्या करू
मैं तो सदा तेरा रहा
अब वक्त गुजरा है जरा
किसी और का सपना तुझे
प्यारा लगे तो मैं क्या करू