रविवार, 8 फ़रवरी 2009

Fate

तेरा एक आंसू हटाने को
अपने हज़ार अश्को की दुआ करूँ
जो भटक के डर बदर अगर
मेरे अश्क सूखे तो मैं क्या करूँ

तेरी राह में तेरा साथ दूँ
ये वादा है इरादा है
मेरे नाकाम सफर से थक अगर
मेरे पग रुके तो मैं क्या करूँ

मैंने तो छोडा ये जहाँ
मेरी जमीं तू आसमां
दुनिया से डर तू ही अगर
पीछे हटे तो मैं क्या करू

मैं तो सदा तेरा रहा
अब वक्त गुजरा है जरा
किसी और का सपना तुझे
प्यारा लगे तो मैं क्या करू


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