मंगलवार, 26 अगस्त 2008

Fate of Wishes

This is not written by me but i love it...

जरा पाने की चाहत में
बहुत कुछ छूट जाता है
ना जाने सब्र का धागा
कहाँ पर टूट जाता है

किसे हमराह कहते हो
यहाँ तो अपना साया भी
कंही पर साथ रहता है
कंही पर छूट जाता है

गनीमत है नगर वालो
लुटेरों से लुटे हो तुम
हमें तो गावं में अक्सर
दरोगा लूट जाता है

अजब श्य है ये रिश्ते भी
बहुत मजबूत लगते है
जरा सी भूल से लेकिन
भरोसा टूट जाता है

बमुश्किल हम मोहब्बत के
दफीने खोज पाते है
मगर हर बार ये दोलत
सिकंदर लूट जाता है

कोई टिप्पणी नहीं: